पिछले लोकसभा चुनाव में नरेन्द्र मोदी ने देश की जनता से अच्छे दिन लाने का वादा किया था। जब से नरेन्द्र मोदी प्रधानसेवक बने हैं, उन्होंने पूरी मेहनत और लगन के साथ अच्छे दिनों को लाने में दिनरात एक कर दी है। हमेशा घाटे में चलने वाली कंपनियों को मुनाफा कमाने वाली सरकारी कंपनियां बना दिया है।

दरअसल, दो साल पहले कुछ सरकारी कंपनियों की हालत यह थी कि जानेमाने अर्थशास्त्रियों तक ने उन्हें बंद करने का सुझाव दिया था। उस समय नरेन्द्र मोदी के पास दो विकल्प थे, एक या तो वो घाटे में चल रही कंपनियों को बंद करते या फिर दूसरा जो जैसा चल रहा था, उसे वैसा चलने देते। किसी ने भी नहीं सोचा था कि “लाभ और परिचालन क्षमता” भी एक विकल्प हो सकता था। मोदी सरकार ने लीग से हटकर इस विकल्प को अपनाते हुए निवेश को बढ़ाने का फैसला किया और कंपनियों के मैनेजमेंट में आमूलचूल परिवर्तन किए। नतीज़ा यह रहा है कि आज बहुत सी कंपनियां मुनाफे में चल रही हैं।

गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर नरेन्द्र मोदी ने बहुत सी सरकारी कंपनियों का कायाकल्प किया था। उनका रिकॉर्ड दर्शाता है कि गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने एक या दो नहीं बल्कि, तकरीबन पचास सरकारी कंपनियों को घाटे से मुनाफे में दौड़ाया। जिन कंपनियों को उन्होंने मुनाफे में दौड़ाने का काम किया, उनमें सबसे पहले गुजरात स्टेट पेट्रोनेट लिमिटेड और गुजरात मिनिरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड को लिया जा सकता है। उनका वही तज़ुर्बा प्रधानमंत्री बनने के बाद काम आ रहा है।

प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेन्द्र मोदी ने वही नीति भारत सरकार के अधीन कंपनियों के लिए भी अपनाई। जो कंपनियां घाटे से मुनाफा कमा रही हैं उनमें भारतीय रेलवे को लिया जा सकता है। एअर इंडिया को लिया जा सकता है। महानगर टेलीकॉम निगम लिमिटेड और भारत संचार निगम लिमिटेड को लिया जा सकता है, साथ ही कोल इंडिया का उदाहरण भी लिया जा सकता है।

एअर इंडिया

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एअर इंडिया एक बहुत लंबे समय से घाटे में चल रही थी। हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने इससे जुड़ी जानकारी ट्विटर के माध्यम से सार्वजनिक करते हुए, एअर इंडिया में लंबे समय से ऑपरेशनल प्रॉफिट कमाने की बात कही।

क्वार्ट्ज़ इंडिया नामक ऑनलाइन प्रकाशन में 16 मार्च को मनु बालाकृष्णन के द्वारा एक खबर प्रकाशित करवाई गई थी कि नौ साल तक लगातार घाटा कमाने के बाद आखिरकार एअर इंडिया ने मुनाफा कमाना शुरु कर दिया है। उस रिपोर्ट के मुताबिक एअर इंडिया को 30,000 करोड़ रुपयों का घाटा हुआ। इस तरह का कायाकल्प करना किसी चमत्कार से कम नहीं होता है।

एअर इंडिया के मामले में सरकार के सामने परिस्थितियां भिन्न थीं। उनके सामने चुनौती थी कि घाटे में चल रही कंपनी को पहले कैसे मुनाफे में चलाया जाए।

कोल इंडिया

कोल इंडिया जैसे बड़ी कंपनी को नुकसान से फायदे में पहुंचाना बहुत ही बड़ी चुनौती थी। एक लंबे समय से घाटे में चल रही कोल इंडिया में पिछले वित्तीय वर्ष में 16 फीसदी ग्रोथ दर्ज की गई, जो कि एक बड़ी उपलब्धि है। इस तरह के एक नहीं बल्कि अनेकों उदाहरण दिए जा सकते हैं। भारत में कोयला का उपयोग कई चीज़ों के लिए किया जाता है। यहां तक कि बिजली उत्पादन के लिए भी बड़ी संख्या में कोयले का ही प्रयोग किया जाता है।

किसी भी सरकार के लिए बिजली से सम्बन्धित तीन प्रकार की चुनौतियां होती हैं। एक, मांग के अनुरूप बिजली उत्पादन करना, दो, उसका सही से वितरण करना और तीन, सही ढंग से उसे खपत लायक बनाना।

मोदी सरकार ने इन तीन बिंदुओं के ऊपर ध्यान केन्द्रित करके फैसले किए और कई जनुपयोगी योजनाएं जैसे कि उत्पादन के लिए “दीनदयाल उपाध्याय जीवन ज्योति योजना” और बिजली वितरण कंपनियों के लिए “उदय” व सरकार के काम को मॉनिटर करने के लिए “गर्व” जैसी योजनाओं को शुरु किया। इन योजनाओं ने न केवल उपभोक्ताओं के भले का ध्यान रखा बल्कि घाटे में चल रही प्रादेशिक बिजली वितरण कंपनियों के लिए भी संजीवनी का काम किया।

बीएसएनएल

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बीएसएनएल ने भी काफी लंबे अंतराल के बाद वित्तीय वर्ष 2015 में मुनाफा अर्जित किया। पिछले साल बीएसएनएल ने 672 करोड़ रुपयों का ऑपरेशनल प्रॉफिट अर्जित किया। बीएसएनएल की स्थिति ऐसी थी कि वो अपना मार्किट शेयर और पैसा दोनों बड़ी संख्या में बर्बाद कर चुकी थी। मोदी सरकार के सकारात्मक प्रयासों से ही यह सब कुछ संभव हो पाया है। यूपीए सरकार के कार्यकाल में भी काफी प्रयास किए गए थे लेकिन उनके सारे प्रयास विफल रहे थे।

सरकारी कंपनियों का मुनाफे में चलना अर्थव्यवस्था के लिए पॉज़िटिव साइन होता है। सरकारी कंपनियों में जो पैसा लगा होता है वो किसी और का नहीं बल्कि देश के करदाताओं का होता है। सरकार के ऊपर दबाव होता है कि करदाताओं के पैसे को वो सही जगह पर निवेश करे और उन्हें बेहतर से बेहतर रिटर्न्स प्रदान करें और उस पैसे को जन सुविधाओं को लिए खर्च करे।

सरकारी कंपनियां जितना अधिक मुनाफा अर्जित करेंगी, सरकार उतनी ही अधिक सुखसुविधाएं जनता को प्रदान कर सकती है। मोदी सरकार ने कई कठिन चुनौतियों का सामना करते हुए जन हित में फैसले किए हैं जो कि सफल भी हुए हैं।

उम्मीद है कि आने वाले समय में भी मोदी सरकार इसी तरह के बड़े से बड़े फैसलों को आराम से लेगी। अभी तक एक बात तो तय है कि जिस काम के लिए मोदी सरकार को दो साल पहले चुना गया था, वह सिद्ध हो रहा है। देश में सरकारी कंपनियों के अच्छे दिन आ गए हैं और ज़ल्द ही अन्य क्षेत्रों में भी किए गए विकास के आंकड़े जारी किए जाएंगे।

विजय कुमार