विकास और आर्थिक सुधारों के इस दौर में आज भारत पूरी दुनिया को एक नया आकार देने के लिए एक प्रमुख शक्ति बनकर उभर रहा है। इसी दिशा में एक और कदम आगे बढ़ाते हुए कैबिनेट ने कपड़ा उद्योग में भी 6,000 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज को मंज़ूरी दे दी है। इस निवेश से न सिर्फ अगले तीन वर्षों में भारत में एक करोड़ नौकरियों के अवसर पैदा होंगे बल्कि भारत पूरी दुनिया का तन ढकने के लिए भी एक मजबूत स्थिति में आकर खड़ा हो जायेगा।

प्रधानमन्त्री मोदी के नेतृत्व में भारत पहले से ही विश्व की प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था में आइएमएफ, वर्ल्डबैंक और डब्लूटीओ जैसी संस्थाओं में एक खासा मुकाम बना चुका है। इस वैश्विक अर्थव्यवस्था में 280 बिलियन डॉलर का आंकड़ा पार कर चुके कपड़े के बाज़ार में भी अब भारत, चीन से आगे निकल कर नंबर-वन बनना चाहता है और इसलिए ही इतने बड़े निवेश के साथ-साथ श्रमसुधारों को भी अंजाम दिया गया है।

भारत कपड़ा उद्योग में निर्यात करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है। सरकार की इस नई पहल से निर्यात में 30 अरब अमेरिकी डॉलर की वृद्धि होगी। यदि दूरगामी परिणाम की बात की जाए तो अब से 2024-25 तक 300 अरब के निर्यात लक्ष्य को हासिल किया जा सकेगा  और 5 करोड़ नौकरियों के अवसर पैदा किये जा सकेंगे। इन नौकरियों में 70 फीसदी महिलाओं की हिस्सेदारी होगी क्योंकि कपड़ा उद्योग के कामगारों में महिलाओं की संख्या सबसे अधिक होती है। इस हिस्सेदारी के माध्यम से देश में बड़े ही विस्तृत पैमाने पर महिला सशक्तिकरण के साथ एक सकारात्मक सामाजिक बदलाव भी लाया जा सकेगा।

यदि गारमेंट सेक्टर में निर्यात की बात की जाए तो भारत का निर्यात प्रतिवर्ष 8 प्रतिशत तक बढ़ा है जबकि बांग्लादेश और वियतनाम का निर्यात प्रतिवर्ष 14 और 11 प्रतिशत बढ़ा है। कपड़ा उद्योग में बांग्लादेश, वियतनाम, कम्बोडिया जैसे छोटे देशों ने भी नीतियों के माध्यम से ही अपने स्थानीय उद्योग को मजबूत किया था। लेकिन आज के प्रतिस्पर्धी दौर में चीन की सबसे बड़ी मुश्किल है कि उनके यहाँ मजदूरी महंगी होती जा रही है और बांग्लादेश व अन्य देशों की समस्या उनके पास वैल्यू-चेन सिस्टम का अभाव होना है। इसलिए इन देशों की स्थिति में आने वाले परिवर्तन का विशेष लाभ, सरकार द्वारा किये गए श्रम-सुधारों से अब भारत को मिलने वाला है।

टेक्सटाइल और गारमेंट व्यवसाय में श्रम कानून में सुधार ही इस उद्योग को अधिक प्रभावी और बेहतर बना सकते हैं इसलिए श्रम कानूनों द्वारा अनेक क्षेत्रों में छूट बढ़ाई गई है। सरकार गारमेंट सेक्टर में मौसम के अनुसार काम को ध्यान में रखते हुए एक निर्धारित अवधि वाले रोज़गार को अनुमति दे रही है। गारमेंट सेक्टर के लिए सब्सिडी को 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत किया गया है। टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन फंड स्कीम (टीयूएफएस) के तहत गारमेंट सेक्टर में आने वाली नई इकाइयों के लिए 10 प्रतिशत सब्सिडी की घोषणा की गई है। अब कामगारों को अधिक मजदूरी मिलेगी। अन्य सुधारों में कामगारों के लिए ओवरटाइम करने के घंटे भी बढ़ाये गए हैं जो आईएलओ नियमों के अनुसार आठ घंटे से अधिक नहीं होंगे। इस प्रकार से श्रम कानूनों के उदारीकरण के माध्यम से भारत के कपड़ा उद्योग को पूरे विश्व में एक लम्बा रास्ता तय करने में मदद मिलने वाली है।

भारत एक ऐसा देश है जहाँ टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर में संभावनाओं को सफलताओं में बदलने के लिए एक पूरा योजनाबद्ध सिस्टम मौजूद है। जहाँ ‘मेक इन इंडिया’, ‘स्टार्ट-अप इंडिया’, ‘स्टैंड-अप इंडिया’, ‘मुद्रा योजना’ द्वारा भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है वहीँ दूसरी ओर ‘स्किल इंडिया’ के माध्यम से भारत के बाज़ार को ‘स्किल्ड वर्कफोर्स’ भी आसानी से मुहैया होने वाला है। भारत कपास की खेती करने से लेकर कृत्रिम धागे बनाने में पूरी तरह से सक्षम है और यही विशेषता ही भारत को, एक रेशे को भी फैशन की दुनिया में आसानी से पिरोने का हौसला देती है।

भारत के पास इस समय श्रम और कामगारों का एक ऐसा आदर्श मॉडल है जो लागत मूल्य की प्रतिस्पर्धा में पूरी दुनिया के बाज़ार तक भारत को आसानी से पहुंचा सकता है। सरकार जिस तरह से हर क्षेत्र में तकनीकी को आगे बढ़ा रही है और भारत में निवेशकों के लिए व्यवसाय करना आसान बना रही है उस वजह से भारत, समय और बाज़ार की मांग के अनुसार ही कपड़े के निर्यात में भी भारी बढ़ोत्तरी करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

अब कपड़ा उद्योग सिर्फ स्माल स्केल इंडस्ट्रीज तक ही सीमित नहीं रहने वाला है। सरकार के द्वारा उठाये गए इस कदम से यह साफ़ हो गया है कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए भारत, कृषि के बाद सबसे अधिक रोज़गार देने वाले इस टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर का भरपूर उपयोग करना चाहता है।

सरकार के इन नीतिगत सुधारों द्वारा भारत, कपड़ा उद्योग में एक ऐसा विकसित बाज़ार बनाने की राह पर पहुँचने वाला है जहाँ वित्तीय और मानव संसाधनों के माध्यम से तकनीक का सहारा लिया जायेगा और पूरे कपड़ा उद्योग में एक मूलभूत बदलाव लाना बहुत आसान हो जायेगा। 6000 करोड़ के पैकेज और श्रम सुधारों के माध्यम से कपड़ा उद्योग में रोजगार, मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात बढ़ा कर भारत का पूरी दुनिया पर छा जाना ही सरकार का विज़न है।

-संजीव कुमार