देश में आजकल कुछ अलग ही माहौल चल रहा है। देश में इस समय दो तबके उभऱ रहे हैं। एक तबका वो है जो कि नकारात्मकता फैला रहा है और “असहिष्णुता” की बातें कर रहा है या फिर जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार को “हीरो” बना रहा है और फिर भारत माता की जय के उदघोष का विरोध कर रहा है। दूसरा तबका वो है जो कि मोदी सरकार के कीर्तिमानों के बारे में बातें कर रहा है। पहला तबका नहीं चाहता है कि दूसरे तबके की बातें आम जनता तक पहुंचें।

देखा जाए तो असलियत में देश के भीतर शांति ही शांति है। हमारे देश में बोको हरम लाइन से लिटाकर गोलियों से नहीं भून रहा है। तहरीकतालिबान की जड़ें मज़बूत नहीं हैं। हमारे आसपास मारकाट का माहौल नहीं है, शांति से लोगबाग जीवन व्यतीत कर रहे हैं, लोगों की आजीविका जैसे पहले चल रही थी, वैसे ही आज भी चल रही है।

इस बेवजह के शोरशराबे के पीछे जो कारण है, उसे समझने के लिए आंखे मूंदकर शांतिपूर्ण तरीके से दो मिनट तक आत्मचिंतन करने की आवश्यकता है, आंखे खोलने के बाद देश में शांति ही शांति नज़र आएगी। टेलीविज़न देखने वाले लोग (मध्यमवर्गीय परिवार) एक लोकतंत्र में रीढ़ की हड्डी का काम करते हैं। टेलीविज़न या फिर स्मार्ट फोन के माध्यम से मध्यमवर्गीय परिवारों को बरगलाने का काम कुछ मीडिया हाउस कर रहे हैं।

ऐसे बहुत से विकास कार्य हैं जो कि कांग्रेस और यूपीए सरकार के 60 साल के शासनकाल में नहीं हुए थे, वो मोदी सरकार ने महज़ दो साल से भी कम के समय में कर दिखाए हैं। जिनमें से एक भारतीय रेलवे में लाइन बिछाने में आई तेज़ी को लिया जा सकता है। मोदी जी भलीभांति जानते हैं कि अफसरशाही से कैसे काम करवाया जा सकता है।

नौ फरवरी की घटना के बाद राहुल गांधी का जेएनयू कैम्पस में जाना और बाद में दोषियों को सज़ा देने की बातें करना इसी ओर इशारा करता है। कांग्रेस के पास अपनी विचारधारा नहीं बची है।

चाणक्य की नीतियों में “सामदामदंडभेद” की नीति का ज़िक्र अक्सर किया जाता है। ऐसा प्रतीत होता है कि प्रधानमंत्री मोदी को रोकने के लिए विपक्षी दल इसी नीति को अपना रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी “सत्यमेवजयते” की वकालत करते हैं। यही कारण है कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की “सामदामदंडभेद” पर प्रधानमंत्री जी की “सत्यमेवजयते” नीति काफी भारी पड़ रही है।

कांग्रेस खुद को 125 साल पुरानी पार्टी कहती है। बीजेपी को गठित हुए अभी महज़ 34 साल हुए हैं। इस तरह से कांग्रेस बीजेपी से 91 साल पुरानी पार्टी हो जाती है। जिस तरह से एक घर में बड़ेबुज़ुर्ग होते हैं, उसी तरह से कांग्रेस हो चुकी है। सुना है कि घर के बड़ेबुज़ुर्ग हमेशा सही सलाह देते हैं। लेकिन यहां पर सब कुछ उल्टा ही है। कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी ने भी विपक्ष में रहते हुए मुख्य बिलों को पारित करने में मुश्किलें पैदा कीं थीं। 125 साल पुरानी पार्टी को “जैसे को तैसा” नीति को अपनाना कहां तक तर्कसंगत लगता है?

देश का एक ज़िम्मेदार नागरिक होने के नाते कांग्रेस जैसी बुज़ुर्ग पार्टी से यही अपील है कि संसद की कार्रवाई में देश की जनता का पैसा लगता है, कृपया उसे बर्बाद न करें और तार्किक बहस को अंजाम देकर नएनए कानून बनाने में सरकार की मदद करे। देश की जनता ने मोदी सरकार को बहुमत दिया है, धैर्य रखिए, सरकार को पांच साल काम करने दीजिए, यदि सरकार सही से काम नहीं कर रही है तो जनता मोदी जी को वर्ष 2019 में अपना फैसला सुना देगी।

एक ओर तो कांग्रेस और विपक्षी दल दिखाते हैं कि वो देश की कितनी परवाह करते हैं और दूसरी ओर देश को विभाजित करने वाली ताकतों का समर्थन करते देश को तबाह करने का बातें करते हैं। कांग्रेस कैमरे के सामने देशद्रोही घटनाओं की निंदा करती है और पीछे से उनका समर्थन भी करते हैं। पिछले दिनों हरियाणा में जाट आंदोलन के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री के सलाहकार का ऑडियो टेप जनता के सामने आया था, उससे कांग्रेस की असलियत देश के सामने आ गई थी, कि देश के प्रति वो क्या विचार रखती है।

इंदिरा गांधी ने एक बार “गरीबी हटाओदेश बचाओइंदिरा लाओ” का नारा दिया था। आज भी कांग्रेस का यही मूलमंत्र है। कैमरे के सामने कांग्रेस देश में से गरीबो को हटाने की बातें करती है। दरअसल, सच्चाई यह है कि कांग्रेस कभी नहीं चाहेगी कि देश से गरीबी खत्म हो, यदि गरीबी खत्म हो गई तो फिर उनके पास चुनावी हथकंडा नहीं रह जाएगा।

मोदी जी चाहते हैं कि देश में से गरीबी खत्म हो और इसीलिए मोदी जी शिक्षा पर ज़ोर देते हैं। गरीबी को केवल शिक्षा से खत्म किया जा सकता है और शिक्षित होने के बाद कोई भी व्यक्ति सही गलत का अंदाज़ा लगा सकेगा, सहीगलत का अंदाज़ा होने पर और सच्चाई को जानकर एक शिक्षित समाज कांग्रेस को कभी वोट नहीं देगा।

यदि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल उपरोक्त लिखित बातों से इत्तेफाक नहीं रखते हों तो फिर सामने आकर गरीबी को खत्म करने में मोदी सरकार का साथ दे। गरीबों को साक्षर बनाने में मोदी सरकार का साथ दें। बेटियों को पढ़ाने में मोदी सरकार का साथ दें। देश से गंदगी को साफ करने में मोदी सरकार का साथ दें। देश में स्किल्ड लेबर को बढ़ावा देने के लिए मोदी सरकार का साथ दें। मेक इन इंडिया को सफल बनाने में मोदी सरकार का साथ दें। डिजिटल इंडिया को सफल बनाने में मोदी सरकार का साथ दें। किसानों की आय को दोगुनी करने के लिए मोदी सरकार का साथ दें। रोज़गार सृजन करने के लिए मोदी सरकार का साथ दें। व्यर्थ की बातों में देश का अनमोल समय बर्बाद न करें।