आज के राजनीतिक परिदृय पर वर्ष 1974 में आई फिल्म रोटी का एक मशहूर गीत “ये पब्लिक है, सब जानती है!” एकदम सटीक बैठती है।

कांग्रेस पार्टी को इस लेख के केन्द्र में रखा गया है क्योंकि आज भी कांग्रेस उसी पुरानी रणनीति को अपनाती है। कांग्रेस को विश्वास करना होगा कि अब वो सत्ता में नहीं हैं। जिस तरह से 60 वर्षों से कांग्रेस ने देश की जनता को टोपी पहनाई, उसे अब जनता पहचान चुकी है, सच जनता के सामने आ चुका है।

कांग्रेस को लगता था कि उसके राज में जितने भी घोटाले हो रहे हैं, उनका पता देश की जनता को नहीं लगेगा। उन्होंने जो गुल खिलाए थे, वो कभी उज़ागर नहीं होंगे, लेकिन समय बदला और सब कुछ वैसा नहीं रहा जैसा कि कांग्रेस चाहती थी। कांग्रेस पार्टी ने कभी भी प्रोद्योगिकी विकास पर ध्यान क्यों नहीं दिया था? इस बारे में आज तक चर्चा नहीं की गई, हम लोग इस विषय पर भी फोकस करेंगे। हालिया दिनों में कांग्रेस ने किनकिन बातों को बेवजह तूल देने की कोशिश की है, इसके ऊपर एक नज़र डालते हैं

नेताजी” जासूसी कांड

पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि देश में गांधीनेहरू परिवार के अलावा भी कोई दूसरी पार्टी शासन करेगी। उनके जीवित रहने तक देश आज़ाद होने तक केवल वो ही देश के प्रधानमंत्री चुने गए थे। उनके भीतर सत्ता का लालच था इसीलिए कोई भी गैर गांधीनेहरू परिवार का सदस्य देश का प्रधानमंत्री नहीं बना था। सत्ता के चले जाने का डर इतना था कि कांग्रेस के आज़ादी पूर्व अध्यक्ष और स्वतंत्रता सेनानी नेताजी श्री सुभाष चन्द्र बोस की जासूसी तक करवाई गई। यहां तक कि जर्मनी आदि जैसे देशों को पत्र भी लिखे गए और नेताजी की जमकर बुराई की गई। नेहरू और कांग्रेस ने कभी भी सच को देश के सामने नहीं आने दिया। धन्य हो प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी, जिन्होंने नेताजी से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करने का फैसला लिया और देश के सामने कांग्रेस की करतूतों का खुलासा किया।

मुझे आशा है कि पूर्व प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जी की मौत के रहस्य से भी पर्दा उठाने में मोदी सरकार ज़ल्द ही कुछ न कुछ फैसला लेगी। मेरा गांधीनेहरू परिवार को यह संदेश है कि साहेब, ये पब्लिक है, सब जानती है! इनके साथ धोखा करके आप जीत की आशा करें, यह उचित नहीं है।

इशरत जहाँ एनकाउंटर मामला

अमेरिका की जेल में बंद लश्करतैयबा के आतंकी डेविड हेडली ने खुलासा किया है कि इशरत जहां लश्कर की आतंकी थी और गुजरात में मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की हत्या करने के लिए उसे लश्कर ने ही भेजा था। कांग्रेस के तत्कालीन गृहमंत्री पी. चिदम्बरम साहेब के कहने पर एक हलफनामा दायर कर केन्द्र सरकार के द्वारा एनकाउंटर को फर्जी बताकर नरेन्द्र मोदी को घेरने की कोशिश की। कांग्रेसी विचारधारा (नेहरूवादी सोच) से प्रेरित पी. चिदम्बरम साहेब ने भी कभी नहीं सोचा होगा कि जब कभी कोई दूसरी पार्टी सत्ता में आएगी और उनके काले कारनामे देश के सामने उजागर हो सकते हैं। कांग्रेस पार्टी अब बेपर्दा हो चुकी है।

यदि जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी जैसे नेताओं को तनिक भी इस बात का आभास होता कि उनकी सच्चाई देश के सामने आ ही जाएगी तो वो नेताजी की जासूसी साबित करने वाले कोई सबूत ज़िंदा ही नहीं छोड़ते। भला हो तकनीकी का, जिसके कारण सोच में बदलाव आया कांग्रेस पार्टी कभी नही चाहती थी और न कभी चाहेगी कि देश तरक्की करे, देश में सूचना प्रोद्योगिकी का विकास हो और शासन में पारदर्शिता आए। यदि मोदी सरकार अब उनके काले कारनामों को उजागर भी कर रही है तो हर बात को छिपाने के लिए कांग्रेस बेवजह की बातों को तूल देने में लग जाती है ताकि शोर मचाकर असलियत को दबाया जा सके। कांग्रेस को समझना होगा कि ये पब्लिक है सब जानती है! सच को जितना मर्जी छिपा लो लेकिन एक न एक दिन सच दुनिया के सामने आ ही जाता है।

असहिष्णुता

जब कांग्रेस पार्टी की पोल खुलने लगी तो उसे छिपाने के लिए इनके द्वारा तरहतरह के हथकंडे अपनाए गए। कभी ललित मोदी के बेवजह के मुद्दे को तूल दिया गया तो कभी विजय माल्या के साथ बीजेपी सरकार के मधुर सम्बन्ध होने की बेकार की बातें की गईं। पिछले दिनों हद तो जब हो गई देश में सारे तथाकथित बुद्दिजीवियों को अचानक से याद आया कि देश में असहिष्णुता काफी हद तक बढ़ गई है। पुरस्कार वापस करने शुरु कर दिए गए। साहित्यकार देशभक्ति का चोला पहनकर लाइन में खड़े हुए थे और मानो होड़ सी मच गई थी कि पहले कौन अपना पुरस्कार वापस करता है। दरअसल, सच्चाई यह थी कि वो तथाकथित बुद्धिजावी और साहित्यकार कांग्रेस पार्टी के आकाओं के सामने जताना चाहते थे कि वो कितने बड़े कांग्रेस भक्त हैं। मेरा उन सभी साहित्यकारों से सवाल है कि कांग्रेस का काले कारनामों का खुलासा होने पर आप लोगों के भीतर का जमीर क्यों नहीं जग रहा है? अब आप लोग क्यों नहीं रोष व्यक्त कर रहे हैं? आप लोग जवाहरलाल नेहरू की आलोचना और निंदा क्यों नहीं कर रहे हो? मैं फिर से कांग्रेस भक्त और तथाकथित बुद्धिजीवियों को बताना चाहता हूं कि ये पब्लिक है, सब जानती है! झूठे दिखावे की मियाद ज़्यादा नहीं होती है। किसी ने सही ही कहा है कि “खुशबू आ नहीं सकती, क़ाग़ज़ के फूलों से ”। कांग्रेस ने क़ाग़ज़ के फूलों से लोगों को खुशबू प्रदान करने की एक नहीं अनेकों व्यर्थ कोशिशें की हैं।

अखलाक, रोहित और कन्हैया प्रकरण

उत्तरप्रदेश के दादरी में बीफ खाने के संदेह में एक मुस्लिम व्यक्ति की हत्या भीड़ के द्वारा कर दी जाती है। जहां पर कि सपा सरकार का शासन है। यहां पर गुजरात दंगों की बात करेंगे क्योंकि यहां पर यह लाज़मी है, जिस समय गुजरात दंगे हुए थे, वहां पर नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार सत्ता में थी, कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि गुजरात में दंगे हुए हैं, वहां पर कानून व्यवस्था की ज़िम्मेदारी नरेन्द्र मोदी सरकार की बनती है, इसलिए इन सभी हत्याओं के लिए नरेन्द्र मोदी ही दोषी हैं और उन्हें माफी मांगनी चाहिए। मैं कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों से पूछता हूं कि उत्तरप्रदेश में हुई एक हत्या के लिए आपको नरेन्द्र मोदी को दोषी ठहराना चाहिए या फिर अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा सरकार को? इस सवाल के जवाब से आपके दोगलेपन का जवाब देश की जनता को मिलेगा। मैं एक बार फिर से कहता हूं कि ये पब्लिक है, सब जानती है! जनता को बेवकूफ समझने की गलती भी गलती से मत कीजिएगा। पब्लिक की वजह से ही आप लोगों का वजूद है। जनता है तो आप हैं, अन्यथा आप की औकात कुछ भी नहीं। जहां तक रोहित वेमुला प्रकरण का सवाल है तो उसके लिए भी हैदराबाद सरकार को ज़िम्मेदार ठहराना चाहिए न कि नरेन्द्र मोदी सरकार को।

पिछले कुछ दिनों में कन्हैया कुमार नाम का एक नया नेता देश में एकाएक पैदा हो गया है। लगभग दम तोड़ चुकी वामपंथी विचारधारा को मानो संजीवनी मिल गई हो। वामपंथी विचारधारा को मानने वाले लोगों को कन्हैया के भीतर भगवान दिखाई दे रहा है। इसमें वामपंथियों का स्वार्थ निहित है। उन्हें लग रहा है कि कन्हैया उनकी विचारों को बुलंद करेगा और भविष्य में होने वाले चुनावों में जीत दिलाएगा। लेकिन यह केवल भ्रम मात्र है। जो इंसान देशविरोधी नारे लगाने का समर्थन करता हो, आतंकवादियों का समर्थन करता हो, वो भला मसीहा कैसे हो सकता है? जो इंसान देश में नृशंष हत्या करने वाले आतंकी अफजल गुरू की वर्षी का आयोजन कर रहा हो और मातृभूमि के टुक़ड़ेटुक़ड़े करने का बातों का समर्थन करता हो, वो भला मसीहा कैसे हो सकता है? कन्हैया केवल मीडिया की नज़रो में हीरो बना है, देश की जनता को इसका फैसला करने दीजिए।

योजनाओं का सच

कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी ने जितनी भी योजनाएं शुरु की हैं, वो उनके ही कार्यकाल में शुरु की गईं थीं, केवल नाम बदल दिए गए हैं। सवाल यह है कि अगर वो कांग्रेस की ही नीतियां हैं तो फिर आपके उपाध्यक्ष उनका विरोध क्यों करते हैं? क्या कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी इस बात को नहीं जानते हैं? मैं यह इसलिए पूछ रहा हूं क्योंकि पिछले दिनों उन्हें मोदी सरकार की योजनाओं का मज़ाक बनाते देखा गया था। एक बार फिर से कांग्रेस के लिए यही लाइन सटीक बैठती है कि ये पब्लिक है, सब जानती है!

अंत में केवल यही कहा जा सकता है कि जनता को उस समय बेवकूफ बनाया जा सकता था, जब तक जनता तक सूचना पहुंचने का कोई साधन नहीं था। आज का युवा ट्वीटर पर है, फेसबुक पर है, जागरूक है, उसे बेवकूफ बनाना उतना आसान नहीं है। आज हमारे पास ऐसा प्रधानमंत्री है जो कि बिना छुट्टी लिए निःस्वार्थ भाव के साथ काम कर रहा है और युवाओं को आगे आने के लिए प्रेरित कर रहा है। आपके 46 वर्षीय युवा नेता “युवराज” की तरह नहीं कि छुट्टी पर कब और कहां चले जाएं, खुद को नहीं पता होता है।

विजय कुमार